ऐ मौत! उन्हें भुलाये ज़माने गुज़र गये - ख़ुमार ब़राबंक्वी
ऐ मौत! उन्हें भुलाये ज़माने गुज़र गये
आ जा कि ज़हर खाये ज़माने गुज़र गये
ओ जाने वाले आ कि तेरे इंतज़ार में
रस्ते को घर बनाये ज़माने गुज़र गये
ग़म है ना अब ख़ुशी है ना उम्मीद ना यास
सब से नजात पाये ज़माने गुज़र गये
(यास =मायूसी / निराशा)
क्या लायक-ए-सितम भी नहीं अब मैं दोस्तों
पत्थर भी घर में आये ज़माने गुज़र गये
जाने बहार फूल नहीं आदमी हूँ मैं
आ जा कि मुस्कुराये ज़माने गुज़र गये
क्या क्या तवक्को'अत थी आहों से ऐ 'ख़ुमार'
ये तीर भी चलाये ज़माने गुज़र गये
ऐ मौत! उन्हें भुलाये ज़माने गुज़र गये
आ जा कि ज़हर खाये ज़माने गुज़र गये
ओ जाने वाले आ कि तेरे इंतज़ार में
रस्ते को घर बनाये ज़माने गुज़र गये
ग़म है ना अब ख़ुशी है ना उम्मीद ना यास
सब से नजात पाये ज़माने गुज़र गये
(यास =मायूसी / निराशा)
क्या लायक-ए-सितम भी नहीं अब मैं दोस्तों
पत्थर भी घर में आये ज़माने गुज़र गये
जाने बहार फूल नहीं आदमी हूँ मैं
आ जा कि मुस्कुराये ज़माने गुज़र गये
क्या क्या तवक्को'अत थी आहों से ऐ 'ख़ुमार'
ये तीर भी चलाये ज़माने गुज़र गये
(तवक्को =भरोसा / उम्मीद)
- ख़ुमार ब़राबंक्वी
- ख़ुमार ब़राबंक्वी
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