गुरुवार, ८ जुलै, २०१०

आज की रात भी गुजरी है मेरी कल की तरह

आज की रात भी गुजरी है मेरी कल की तरह - अमीर कजल्बश

आज की रात भी गुजरी है मेरी कल की तरह
हाथ आये ना सितारे तेरे आंचल की तरह

रात जलती हुई ऐसी चिता है जिस पर
तेरी यादें हैं सुलगते हुये संदल की तरह
(संदल = Sandalwood)

तू कि दरिया है मगर मेरी तरह प्यासा है
मैं तेरे पास चला आऊंगा बादल की तरह

मैं हूं इक ख्वाब मगर जागती आंखों का 'अमीर'
आज भी लोग गवाँ दे ना मुझे कल की तरह

- अमीर कजल्बश

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