शुक्रवार, ९ जुलै, २०१०

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किये

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किये - हफीज होशियारपुरी

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किये
इक ही लम्हे में जैसे उम्र भर देखा किये

दिल अगर बेताब है दिल का मुकद्दर है यही
जिस कदर थी हम को तौफीक-ए-नजर देखा किये

खुद-फरोशाना अदा थी मेरी सूरत देखना
अपने ही जलवे बा-अंदाज-ए-दिगर देखा किये
(खुद-फरोश =अहंकारी, डींगमार, स्वार्थी)
(बा-अंदाज-ए-दिगर = एक अलग तरीके से / शैली; दिगर = हटके)

नाशनास-ए-गम फकत दाद-ए-हुनर देते रहे
हम मता-ए-गम को रुसवा-ए-हुनर देखा किये
(नाशनास-ए-गम = दुःख के साथ अपरिचित )
(दाद-ए-हुनर =किसीके कौशल के लिए प्रशंसा ; रुसवा =बदनामी / कलंकित / लांछित)

देखने का अब आलम है कोई हो या न हो
हम जिधर देखा किये पहरों उधर देखा किये

हुस्न को देखा है मैं ने हुस्न की खतिर 'हफीज'
वर्ना सब अपना ही मियार-ए-नजर देखा किये
(मियार =अंदाज; मियार-ए-नजर = तुलना का स्तर / पैमाना)

- हफीज होशियारपुरी

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