आगे बढे ना किस्सा-ए-इश्क-ए-बुताँ से हम - अल्ताफ हुसैन हली
आगे बढे ना किस्सा-ए-इश्क-ए-बुताँ से हम
सब कुछ कहा मगर ना खुले राजदाँ से हम
(किस्सा-ए-इश्क-ए-बताँ = महबूब के मुहब्बत की दास्ताँ; राजदाँ =विश्वासपात्र)
अब भागते हैं साया-ए-इश्क-ए-बुताँ से हम
कुछ दिल से हैं डरे हुए कुछ आसमाँ से हम
(साया-ए-इश्क-ए-बुताँ = महबूब के मुहब्बत की परछाई )
हंसते हैं उसके गिरीया-ए-बेइख्तियार पर
भूले हैं बात कहके कोई राजदाँ से हम
(गिरीया= कोहराम / गीला, इख्तियार= अंकुश / नियंत्रण)
(गिरीया-ए-बेइख्तियार = असीमित गिले-शिकवे)
अब शौक से बिगाड की बातें किया करो
कुछ पा गये हैं आप की तर्ज-ए-बयाँ से हम
(तर्ज-ए-बयाँ = बात करने का अंदाज़)
जन्नत में तू नही अगर ये जख्म-ए-तेज-ए-इश्क
बदलेंगे तुझको जिन्दगी-ए-जाविदाँ से हम
(तेज= प्रतिशोध; जख्म-ए-तेज-ए-इश्क =प्यार के प्रतिशोध की घाव)
(जिन्दगी-ए-जाविदाँ = असीम जीवन)
- अल्ताफ हुसैन हली
आगे बढे ना किस्सा-ए-इश्क-ए-बुताँ से हम
सब कुछ कहा मगर ना खुले राजदाँ से हम
(किस्सा-ए-इश्क-ए-बताँ = महबूब के मुहब्बत की दास्ताँ; राजदाँ =विश्वासपात्र)
अब भागते हैं साया-ए-इश्क-ए-बुताँ से हम
कुछ दिल से हैं डरे हुए कुछ आसमाँ से हम
(साया-ए-इश्क-ए-बुताँ = महबूब के मुहब्बत की परछाई )
हंसते हैं उसके गिरीया-ए-बेइख्तियार पर
भूले हैं बात कहके कोई राजदाँ से हम
(गिरीया= कोहराम / गीला, इख्तियार= अंकुश / नियंत्रण)
(गिरीया-ए-बेइख्तियार = असीमित गिले-शिकवे)
अब शौक से बिगाड की बातें किया करो
कुछ पा गये हैं आप की तर्ज-ए-बयाँ से हम
(तर्ज-ए-बयाँ = बात करने का अंदाज़)
जन्नत में तू नही अगर ये जख्म-ए-तेज-ए-इश्क
बदलेंगे तुझको जिन्दगी-ए-जाविदाँ से हम
(तेज= प्रतिशोध; जख्म-ए-तेज-ए-इश्क =प्यार के प्रतिशोध की घाव)
(जिन्दगी-ए-जाविदाँ = असीम जीवन)
- अल्ताफ हुसैन हली
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