शुक्रवार, ९ जुलै, २०१०

आज किसी ने बातों बातों में, जब उन का नाम लिया

आज किसी ने बातों बातों में, जब उन का नाम लिया - गुलाम रब्बानी ताबा

आज किसी ने बातों बातों में, जब उन का नाम लिया
दिल ने जैसे ठोकर खाई, दर्द ने बढ़कर थाम लिया

घर से दामन झाड़ के निकले, वहशत का सामान ना पूछ
यानी गर्द-ए-राह से हमने, रख्त़-ए-सफर का काम लिया
(वहशत = डर / चिंता; गर्द-ए-राह =सड़क की धूल / मिट्टी)
(रख्त़-ए-सफर =एक यात्रा पर जरूरत की चीजें / सामान)

दीवारों के साये-साये,उम्र बिताई दीवाने
मुफ्त में तनासानी-ए-गम का अपने पर इल्जाम लिया
(साये-साये=परछाई; तनासानी =बोझ लादना)
(तनासानी-ए-गम =अफ़सोस / व्यथा का बोझ उठाना)

राह-ए-तलब में चलते चलते, थक के हम चूर हुये
जुल्फ की थंडी़ छाँव में बैठे, पल दो पल आराम लिया
(राह-ए-तलब =लक्ष्य / मरज़ी की राह)

होंठ जलें या सीना सुलगे, कोई तरस कब खाता है
जाम उसी का जिसने 'ताबाँ', जुर्'अत से कुछ काम लिया
(जुर्'अत =धृष्टता / साहस)

- गुलाम रब्बानी ताबा

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