शुक्रवार, ९ जुलै, २०१०

मुझको मारा है हर इक दर्द-ओ-दवा से पहले

मुझको मारा है हर इक दर्द-ओ-दवा से पहले - फिराक गोरखपुरी

मुझको मारा है हर इक दर्द-ओ-दवा से पहले
दी सजा इश्क ने हर जुर्म-ओ-खता से पहले
(सजा = सज़ा / दंड; जुर्म = अपराध; खता = ग़लती / ग़फ़लत)

आतिश-ए-इश्क भड़कती है हवा से पहले
होंठ जलते हैं मुहब्बत में दुआ से पहले
(आतिश = आंच / अंगार; आतिश-ए-इश्क =इश्क की आग)

अब कमी क्या है तेरे बे-सर-ओ-सामानों को
कुछ न था तेरी कसम, तर्क-ओ-फना से पहले
(सर-ओ-सामान = ज़रूरते / चल सामग्री / सामान)
(बे-सर-ओ-सामान =खोखले / व्यर्थ की ज़रूरते / चल सामग्री / सामान)
(तर्क =कारण / युक्ति; फना =तबाही / विनाश / विध्वंस; तर्क-ओ-फना =कारण और बरबादी)

इश्क-ए-बेबाक को दावे थे बहुत ख़लवत में
खो दिया सारा भरम शर्म-ओ-हया से पहले
(इश्क-ए-बेबाक =बेफिक्र मोहब्बत; ख़लवत = अकेलेपन / एकांत)
(भरम =छल / मिथ्या; शर्म-ओ-हया =शर्मिंदगी और लज्जा)

खुद-ब-खुद चाक हुये पैरहन-ए-लाला-ओ-गुल
चल गई कौन हवा बाद-ए-सबा से पहले
(खुद-ब-खुद =अपनेआप; चाक = उखड़ना / फाड़ जाना)
(पैरहन-ए-लाला-ओ-गुल =फूलों से बने कपड़े; बाद-ए-सबा =सुबह की हवा)

मौत के नाम से डरते थे हम शौक-ए-हयात
तूने तो मार ही डाला था कजा से पहले
(शौक-ए-हयात = जीवन के चाह; कजा = मृत्यु / अंत)

ग़फ़लत-ए-हस्ती-ए-फानी की बता देंगी तुझे
जो मेर हाल था एहसास-ए-फना से पहले
(गफलत= उपेक्षा; हस्ती-ए-फानी =नश्वर जीवन; एहसास-ए-फना =मौत का एहसास)

हम उन्हें पाके 'फिराक' और भी कुछ खोये गये
ये तकल्लुफ तो ना थे अहद-ए-वफा से पहले
(तकल्लुफ = औपचारिकता; अहद=वचन / वादा)

- फिराक गोरखपुरी

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