हम परवरिश-ए-लौह-ओ-कलम करते रहेंगे - फैज अहमद फैज
हम परवरिश-ए-लौह-ओ-कलम करते रहेंगे
जो दिल पे गुजरती है रकम करते रहेंगे
(परवरिश =शिक्षा / तालीम; लौह-ओ-कलम =लिखने का औजार)
(परवरिश-ए-लौह-ओ-कलम =लिखने के औजार का प्रशिक्षण; रकम = कि गिनती / रेकार्ड रखना)
असबाब-ए-गम-ए-इश्क बहम करते रहेंगे
वीरानी-ए-दौराँ पे करम करते रहेंगे
(असबाब = वजह / सबब / मतलब; असबाब-ए-गम-ए-इश्क =इश्क के गम कि वजह)
(बहम = समेटना / इकट्ठा करना; दौराँ = वक़्त / युग / काल; वीरानी-ए-दौराँ =वक्त का ख़ालीपन)
हम परवरिश-ए-लौह-ओ-कलम करते रहेंगे
जो दिल पे गुजरती है रकम करते रहेंगे
(परवरिश =शिक्षा / तालीम; लौह-ओ-कलम =लिखने का औजार)
(परवरिश-ए-लौह-ओ-कलम =लिखने के औजार का प्रशिक्षण; रकम = कि गिनती / रेकार्ड रखना)
असबाब-ए-गम-ए-इश्क बहम करते रहेंगे
वीरानी-ए-दौराँ पे करम करते रहेंगे
(असबाब = वजह / सबब / मतलब; असबाब-ए-गम-ए-इश्क =इश्क के गम कि वजह)
(बहम = समेटना / इकट्ठा करना; दौराँ = वक़्त / युग / काल; वीरानी-ए-दौराँ =वक्त का ख़ालीपन)
(करम =मेहरबानी / उदारता)
हाँ तल्खी-ए-अय्याम अभी और बढेगी
हाँ अहल-ए-सितम मश्क-ए-सितम करते रहेंगे
(तल्खी =कड़वा / द्वेषपूर्ण; अय्याम =दिन; तल्खी-ए-अय्याम =दिन का कडवापन)
हाँ तल्खी-ए-अय्याम अभी और बढेगी
हाँ अहल-ए-सितम मश्क-ए-सितम करते रहेंगे
(तल्खी =कड़वा / द्वेषपूर्ण; अय्याम =दिन; तल्खी-ए-अय्याम =दिन का कडवापन)
(अहल-ए-सितम = तानाशही / अत्याचारी / जुल्मी लोग)
(मश्क-ए-सितम = अत्याचार / जुल्म सहने कि आदत )
मंजूर ये तल्खी ये सितम हम को गवारा
दम है तो मदावा-ए-अलम करते रहेंगे
(मातम = अलम =अफ़सोस / मातम; मदावा =इलाज / उपचार)
(मदावा-ए-अलम =मातम का इलाज)
मयखाना सलामत है तो हम सुर्खी-ए-मय से
तज्जीन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगे
(सुर्खी =लालिमा; सुर्खी-ए-मय =शराब के लाड़ले; तज्जीन =सजावट; दर =द्वार)
(बाम =छत / मेज़ें की क़तार; हरम = तीर्थस्थान)
(तज्जीन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम = तीर्थस्थान कि तरह द्वार और छतो कि सजावट)
बाकी है लहू दिल में तो हर अश्क से पैदा
रंग-ए-लब-ओ-रुखसार-ए-सनम करते रहेंगे
(लब= होंठ; रुखसार= कपोल / गाल)
(रंग-ए-लब-ओ-रुखसार-ए-सनम =माशूक़ के होंठ और गाल का रंग)
इक तर्ज-ए-तगाफुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
(तर्ज= अंदाज़; तगाफुल = उपेक्षा / अवहेलना; अर्ज करना =व्यक्त करने के लिए)
(तमन्ना =इच्छा / आकांक्षा)
(तर्ज-ए-तगाफुल =उपेक्षा करने का अंदाज़; अर्ज-ए-तमन्ना =चाह को कहना)
- फैज अहमद फैज
(मश्क-ए-सितम = अत्याचार / जुल्म सहने कि आदत )
मंजूर ये तल्खी ये सितम हम को गवारा
दम है तो मदावा-ए-अलम करते रहेंगे
(मातम = अलम =अफ़सोस / मातम; मदावा =इलाज / उपचार)
(मदावा-ए-अलम =मातम का इलाज)
मयखाना सलामत है तो हम सुर्खी-ए-मय से
तज्जीन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगे
(सुर्खी =लालिमा; सुर्खी-ए-मय =शराब के लाड़ले; तज्जीन =सजावट; दर =द्वार)
(बाम =छत / मेज़ें की क़तार; हरम = तीर्थस्थान)
(तज्जीन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम = तीर्थस्थान कि तरह द्वार और छतो कि सजावट)
बाकी है लहू दिल में तो हर अश्क से पैदा
रंग-ए-लब-ओ-रुखसार-ए-सनम करते रहेंगे
(लब= होंठ; रुखसार= कपोल / गाल)
(रंग-ए-लब-ओ-रुखसार-ए-सनम =माशूक़ के होंठ और गाल का रंग)
इक तर्ज-ए-तगाफुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
(तर्ज= अंदाज़; तगाफुल = उपेक्षा / अवहेलना; अर्ज करना =व्यक्त करने के लिए)
(तमन्ना =इच्छा / आकांक्षा)
(तर्ज-ए-तगाफुल =उपेक्षा करने का अंदाज़; अर्ज-ए-तमन्ना =चाह को कहना)
- फैज अहमद फैज
1 टिप्पणी:
सुंदर आहे तुमचा ब्लॉग.
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