आप में गुम हैं मगर सब की ख़बर रखते हैं - ज़मिल मलिक
आप में गुम हैं मगर सब की ख़बर रखते हैं
घर में बैठे हैं ज़माने पे नज़र रखते हैं
नुक्ताचीं देखिये किस किस पे नज़र रखते हैं
हम भी ऐ दीदावारो ऐब-ओ-हुनर रखते हैं
(नुक्ताचीं =आलोचक; दीदावारो = वो लोग, जो विश्लेषण या आलोचना करते हैं)
(ऐब-ओ-हुनर =बुराई और भलाई/सदाचार)
हम से अब ऐ गर्दिश-ए-दौराँ तुम्हें क्या लेना है
इक ही दिल है सो वो ज़र-ओ-ज़बर रखते हैं
(गर्दिश्-ए-दौराँ =दुर्भाग्य के समय; ज़र-ओ-ज़बर =उतार चढ़ाव)
जिस ने इन तीरा उजालों का भरम रखा है
अपने सीने में वो नादीदा सहर रखते हैं
(तीरा उजाला =रोशनी जो अंधेरे से भरा है; नादीदा =अप्रत्यक्ष; सहर =सुबह/सवेरा)
रहनुमा खो गये मंज़िल तो बुलाती है हमें
पाँव ज़ख़्मी हैं तो क्या ज़ौक-ए-सफ़र रखते हैं
(रहनुमा =मार्गदर्शक; ज़ौक =स्वाद / दिलचस्पी)
वो अंधेरों के पयंबर हैं तो क्या ग़म है "ज़मिल"
हम भी आँखो में कई शम्स-ओ-कमर रखते हैं
(पयंबर =पैग़ंबर / भविष्यद्वक्ता; शम्स-ओ-कमर =चाँद और सूरज)
- ज़मिल मलिक
आप में गुम हैं मगर सब की ख़बर रखते हैं
घर में बैठे हैं ज़माने पे नज़र रखते हैं
नुक्ताचीं देखिये किस किस पे नज़र रखते हैं
हम भी ऐ दीदावारो ऐब-ओ-हुनर रखते हैं
(नुक्ताचीं =आलोचक; दीदावारो = वो लोग, जो विश्लेषण या आलोचना करते हैं)
(ऐब-ओ-हुनर =बुराई और भलाई/सदाचार)
हम से अब ऐ गर्दिश-ए-दौराँ तुम्हें क्या लेना है
इक ही दिल है सो वो ज़र-ओ-ज़बर रखते हैं
(गर्दिश्-ए-दौराँ =दुर्भाग्य के समय; ज़र-ओ-ज़बर =उतार चढ़ाव)
जिस ने इन तीरा उजालों का भरम रखा है
अपने सीने में वो नादीदा सहर रखते हैं
(तीरा उजाला =रोशनी जो अंधेरे से भरा है; नादीदा =अप्रत्यक्ष; सहर =सुबह/सवेरा)
रहनुमा खो गये मंज़िल तो बुलाती है हमें
पाँव ज़ख़्मी हैं तो क्या ज़ौक-ए-सफ़र रखते हैं
(रहनुमा =मार्गदर्शक; ज़ौक =स्वाद / दिलचस्पी)
वो अंधेरों के पयंबर हैं तो क्या ग़म है "ज़मिल"
हम भी आँखो में कई शम्स-ओ-कमर रखते हैं
(पयंबर =पैग़ंबर / भविष्यद्वक्ता; शम्स-ओ-कमर =चाँद और सूरज)
- ज़मिल मलिक
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