ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई - दाग देहलवी
ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई
इस लिये रूठ रहे हैं की मनाये कोई
ताक में है निगह-ए-शौक खुदा खैर करे
सामने से मेरे बचता हुआ जाये कोई
हाल अफलाक-ओ-जमीं जो बताया भी तो क्या
बात वो है तेरे दिल की बताये कोई
(अफलाक =आसमान)
आपने 'दाग' को मूंह भी ना लगाया अफसोस
उस को रखता था कलेजे से लगाये कोई
हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे खत भेजा
आप की तरह से मेहमान बुलाये कोई
- दाग देहलवी
ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई
इस लिये रूठ रहे हैं की मनाये कोई
ताक में है निगह-ए-शौक खुदा खैर करे
सामने से मेरे बचता हुआ जाये कोई
हाल अफलाक-ओ-जमीं जो बताया भी तो क्या
बात वो है तेरे दिल की बताये कोई
(अफलाक =आसमान)
आपने 'दाग' को मूंह भी ना लगाया अफसोस
उस को रखता था कलेजे से लगाये कोई
हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे खत भेजा
आप की तरह से मेहमान बुलाये कोई
- दाग देहलवी
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा