मंगळवार, १३ जुलै, २०१०

ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई

ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई - दाग देहलवी

ये जो है हुक्म मेरे पास ना आये कोई
इस लिये रूठ रहे हैं की मनाये कोई

ताक में है निगह-ए-शौक खुदा खैर करे
सामने से मेरे बचता हुआ जाये कोई

हाल अफलाक-ओ-जमीं जो बताया भी तो क्या
बात वो है तेरे दिल की बताये कोई
(अफलाक =आसमान)

आपने 'दाग' को मूंह भी ना लगाया अफसोस
उस को रखता था कलेजे से लगाये कोई

हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे खत भेजा
आप की तरह से मेहमान बुलाये कोई

- दाग देहलवी

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