गुरुवार, ८ जुलै, २०१०

दुनिया से वफा करके सिला ढूंढ रहे हैं

दुनिया से वफा करके सिला ढूंढ रहे हैं - सुदर्शन फाकिर

दुनिया से वफा करके सिला ढूंढ रहे हैं
हम लोग भी नदाँ हैं ये क्या ढूंढ रहे हैं

कुछ देर ठहर जाईये बंदा-ए-इंसाफ
हम अपने गुनाहों में ख़ता ढूंढ रहे हैं

ये भी तो सजा़ है की गिरफ्तार-ए-वफा हूँ
क्यूँ लोग मोहब्बत की सजा़ ढूंढ रहे हैं

दुनिया की तमन्ना थी कभी हम को भी 'फाकिर'
अब ज़ख्म-ए-तमन्ना की दवा ढूंढ रहे हैं

- सुदर्शन फाकिर

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