आप को भूल जायें हम इतने तो बेवफा नहीं - तस्लीम फ़ज़ली
आप को भूल जायें हम इतने तो बेवफा नहीं
आप से क्या गिला करें आप से कुछ गिला नहीं
शीशा-ए-दिल को तोडना उनका तो इक खेल है
हमसे ही भूल हो गई उनकी कोई खता नहीं
काश वो अपने ग़म मुझे दे दें तो कुछ सुकूँ मिले
वो कितना बदनसीब है ग़म ही जिसे मिला नहीं
करना है गर वफा तो क्या कैसे वफा को छोड दूँ
कहते हैं इस गुनाह की होती कोई सज़ा नहीं
- तस्लीम फ़ज़ली
आप को भूल जायें हम इतने तो बेवफा नहीं
आप से क्या गिला करें आप से कुछ गिला नहीं
शीशा-ए-दिल को तोडना उनका तो इक खेल है
हमसे ही भूल हो गई उनकी कोई खता नहीं
काश वो अपने ग़म मुझे दे दें तो कुछ सुकूँ मिले
वो कितना बदनसीब है ग़म ही जिसे मिला नहीं
करना है गर वफा तो क्या कैसे वफा को छोड दूँ
कहते हैं इस गुनाह की होती कोई सज़ा नहीं
- तस्लीम फ़ज़ली
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